Film, TV, OTT, Webseries की Gen-Z और Internet, Laptop, Mobile, Palmtop और Technology की Gen-Z में ज़मीन आसमान का अन्तर।

कुछ ही दिनों पहले Film दे दे प्यार दे-२ देखी । बाप की उम्र के विवाह विच्छेदी और बेटी की उम्र की लड़की से प्यार और उसको Justify साबित करने की कोशिश करती इस वाहियात Film के एक दृश्य में, बाप से नाराज़ होकर लड़की उसे कहती है, "Fuck You" (हो सकता है, निर्देशक अंशुल शर्मा की बहन या औलाद ने उससे ये कहा हो)।

बस, यही असल वजह है: अश्लील, बेशर्म, बेहूदा, वाहियात, सडी़ हुई, गालीबाज़ उपज की। 

आधुनिकता, बेबाकी, बिन्दासिता और तथाकथित Boldness को प्रदर्शित करने की आड़ में, पाश्चात्य संस्कृति को अंगीकार करने की होड़ में: Film, TV, OTT/Webseries ने गिरने की कोई सीमा नहीं छोड़ी है। गालियों की बौछार और अश्लील दृश्यों की भरमार को ये सफलता का हथियार मान चुके हैं।

इसी का भरपूर अनुसरण और प्रदर्शन किया है, तथाकथित छात्र आन्दोलन में स्वयं को Gen-Z का हिस्सा बताने वाले चन्द मुठ्ठी भर बेहूदाओं ने, जो भारत में विश्व के सबसे बड़े Gen-Z वर्ग की आड़ लेकर, देश की संस्कृति सभ्यता को ध्वस्त करने पर आमादा हैं।

स्पष्ट कर दूं, ये चन्द मुठ्ठी भर लोग, २७ करोड़ Gen-Z वर्ग का हिस्सा कदापि नहीं हो सकते जो बेहद बुद्धिमान और सुलझा हुआ है और अपनी बात को गालियों से नहीं बल्कि तालियों से सराही जाने वाली अचूक तार्किक-बौद्धिक पद्धति से रखता या प्रस्तुत करता है।

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